काश उस दिन वो मर गई होती..😭😭😡😡
यह बात 2016 की है। मैं इनको पटना से दरभंगा छोड़ने जा रहा था। लेकिन इन्होंने मुजफ्फरपुर जाने के बाद हमको कहा कि जान आप यहां से रिटर्न पटना चले जाओ मैं यहां से अकेले दरभंगा चली जाऊंगी। हमको मुजफ्फरपुर में ही दीदी के यहां जाना था सो मैं, मन न मानते हुए और उनकी बात मानते हुए उनको बस में बैठाकर चला गया।
मुजफ्फरपुर से दरभंगा जाने में करीब 1 से डेढ़ घंटे लगते हैं। मैं मुजफ्फरपुर के बैरिया बस स्टैण्ड से जैसे ही दीदी के रूम पर पहुंचा वैसे ही उनका कॉल आया कि की जान बस का एक्सीडेंट हो गया है 😭😭 लेकिन मैं ठीक हूं जरा सा चोट लगा है, दूसरे बस में बैठ कर दरभंगा जा रही हूं.. मैं बोला कि मैं आ रहा हूं तो ई महारानी ने हमको साफ साफ मना कर दिया आने से। लेकिन मैं निकल गया दीदी के यहां से। वहां से करीब वहां से 5-6 किलोमीटर दूर जीरो माइल है।मैं जब तक वहां पहुंचा तब तक वर्षा अपने हॉस्टल पहुंच चुकी थी। दर्द थोड़ा कम हुआ था उनका। ऐसा होता है कि अगर ज्यादा चोट लगा रहता है तो सुन होने के कारण एट ए टाइम पता नहीं चलता है।

मैं फिर से अपनी महारानी साहिबा को कॉल किया, कि मैं आ रहा हूं और मैं अभी जीरो माइल में हूं। आने के बाद डॉक्टर के यहां चलेंगे। पहले तो हम पे चिल्ला दी लेकिन अगले ही पल फिर सॉरी बोलते हुए बोली कि जान हॉस्टल बंद हो जायेगा जब तक आप आओगे..
तो मैंने कहा कि किसी के साथ अगर कुछ इमरजेंसी होगा तो हॉस्टल कैसे बंद होगा?? मैं आता हूं आपके हाथ का X-ray करवाता हूं तब उसके बाद डॉक्टर जो बोलेगा वो किया जाएगा। और रही बात तो रात में दरभंगा से मुजफ्फरपुर का बस मिलता है और पटना का भी। जैसा होगा आपको हॉस्टल पहुंचाने के बाद मैं देख लूंगा।
और ये सब बात करते हुए वहीं जीरो माइल के गोलंबर पे खड़ा होकर मैं रो भी रहा था। लेकिन ये लड़की हमको नहीं आने दी। करीब एक से डेढ़ घंटे मैं खड़ा रहा।
खैर हमको कसम ( जो उस समय मैं मानता था) देकर नहीं आने दी। उसके बाद मैं रिटर्न दीदी के यहां गया।
अब धीरे धीरे शाम हुई तो दर्द बढ़ना शुरू हुआ तो उनकी दोस्त सोनिका और अनामिका उनको डॉक्टर के यहां लेकर गई। वहां x-ray करवाने के बाद पता चला कि एक अंगुली फ्रैक्चर हुआ है। उसके बाद उनके हाथ/ हथेली में प्लास्टर हुआ और वो फिर अपने हॉस्टल आई।
हॉस्टल आते-आते रात हो गया था।
मैं भी इनको बीच-बीच में कॉल कर रहा था। जब डॉक्टर के यहां से प्लास्टर करवा के हॉस्टल आईं उसके बाद मैं खाना खाया और सोने की कोशिश कर रहा था।
इसके बाद मेरी शैतान जान का कॉल आया और बोली जी जान बहुत दर्द हो रहा है, क्या करूं??
हमारे रिलेशन के बारे में दीदी को पता नहीं था।
सो बात करने में भी नहीं बन रहा था।
लेकिन कैसे भी थोड़ा धीरे-धीरे बोलकर बात कर रहा था।
हमको बोल रही थी कि जान अपनी बाहों में सुला लो। आपकी बहुत याद आ रही है। मेरे पास आ जाओ। ( ( साली जब मैं बोला तो आने नहीं दी थी और अभी नौटंकी कर रही है/ ऐसे नौटंकी तो नहीं है लेकिन अभी इसको लिखते समय गुस्सा आ रहा है हमको। खैर जान तो मेरी ही है। ) ) कुछ भी था लेकिन मैं भी रो रहा था।
“कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को कभी दुखी या कष्ट में नहीं देख सकता है..!!”
लेकिन मैं उनको सांत्वना दे रहा था। वो बोल रही थी जान आप मेरे हाथ को चूम लो तो मेरा दर्द ठीक हो जाएगा।
ये एक होम्योपैथी का (Tele-Homeopathy) पद्धति वाले सिद्धांत का बात कर रही थी। जहां आदमी की मानसिक संतुष्टि से रोग ठीक हो जाता है।
यह बात मैंने भी महसूस किया है अपनी जान के द्वारा।
मैं सोच रहा की आप आने भी नहीं दी और अभी रो भी रही हो और अभी बुला भी रही हो। लेकिन जान है मेरी, और रो रही है तो चुप भी करवाना ही होगा। मैंने बहुत समझाया, प्यार किया और धीरे – धीरे उनको नींद आने लगी लेकिन जब दर्द बहुत ज्यादा हो तो नींद भी कहां आएगी।
थोड़ी देर के लिए भोर ( early morning 🌅) में इनकी आंख लगी उसके बाद मैं भी थोड़ी देर के लिए सोया।
करीब 5 बजे मैं उठा और फिर दरभंगा जाने के लिए तैयार हुआ। दीदी को बोला कि मैं घर जा रहा हूं और उसके बाद वहां से निकला।
ये भी अपने घर में बोल दिया था कि मैं घर आ रही हूं।
जब इनसे मिला तो मन कर रहा था कि इनको मैं जोर से अपने सीने से लगा लूं और बोलूं कि जान अब आपको कभी अकेला नहीं जाने दूंगा। (और उस दिन के बाद कभी अकेले जाने भी नहीं दिया)
फिर हम बस में चढ़े लेकिन सीट नहीं होने के कारण हम खड़े थे। वो मेरे आगे लेकिन मेरे सामने थी।
इतने दिनों में जब से हम प्यार में आए थे तब से पहली बार इनको जी भर के देखा.. इनकी नशीली आंखों ने पहले से ही दीवाना बना के रख दिया था और अब मदहोश.. लेकिन..
(बाद में इनको यह बात बताया भी की जान पहली बार अपनी जान को हम जी भर के देखे हैं लेकिन जी नहीं भरा)

खैर थोड़े देर के बाद इनको सीट मिली और हम मुजफ्फरपुर आ गए।
उसके बाद हम भगवानपुर आए और एक होटल में नाश्ता (चाट खाए) किए। हमारा आदत ही था कि एक ही प्लेट में खाने का।
उसके बाद हम दाउदनगर के बस में बैठे। लेकिन यहां इन्होंने अलग – अलग बैठने को कहा क्योंकि यहां हम दोनों को जानने वाले बहुत सारे लोग हो सकते थे। और मैं भी अपने प्यार को अभी दुनिया की नजरों से बचाना चाहता था कि कहीं किसी की कोई बुरी नजर न लगे।
उसके बाद हम घर आए। बस का एक किस्सा – मैंने बस वाले को ₹40 दिया लेकिन वो और मांग रहा था। वो उन्होंने इशारा किया कि दे दो थोड़ा और तो मैंने दे दिया..
( मैं यहां एक – एक बात लिख रहा हूं शायद वो कभी पढ़े तो उनको मेरा प्यार याद आए और मेरी जिंदगी में फिर से आ जाए)
उसके बाद इनके घर के पास बस को रुकवाया और ये उतर गई और बस वाले ने हमसे पूछा आप?? तो मैंने बोला आगे उतरूंगा..
उसके बाद मैं भी अपने घर आया।।
उसके बाद अपना नॉर्मल काम किया और रात में उनसे थोड़े बात की और उनको सुलाने के बाद मैं खुद भी सो गया।
सुबह जब उठा तो देखा कि पापा जी बात कर रहे थे वर्षा के बारे में। मैंने उत्सुकता से पूछा तो पता चला कि वर्षा का दरभंगा जाते हुए एक्सीडेंट हो गया है और उसका हाथ टूट गया है। मैंने सोचा कि हाथ कहां टूटा है।। केवल अंगुली टूटा है😃😃 लेकिन ये सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ..😭😭
मैं पूछा कि कहां है वो तो पता चला कि वो घर आई है।
मुझसे रहा न गया और मैं उनको देखने चला गया कि क्या हुआ और कैसे हुआ ❤️♥️🤭🤭
मैं फ्रेश हुआ, साइकिल उठाया और उनके घर गया। जाते वक्त ये सोच रहा था कि क्या- क्या स्क्रिप्ट कहना है😃😃♥️♥️
खैर उनके घर पहुंचा तो देखा कि उनके पापा जी थे और भी घर के लोग थे। मेरे हाय हेलो करने के जस्ट बाद वर्षा रूम से निकली.. मैंने बोला कि अभी पापा जी बताए है कि वर्षा का हाथ टूट गया है तो दौड़ा चला आया..
मैंने पूछा क्या हुआ, कैसे हुआ, ज्यादा कुछ हुआ तो नहीं, ये हाथ टूट गया, बहुत दर्द हो रहा होगा?? मैं एका एक इतना क्वेश्चन कर दिया कि वो भी हैरान हो गई और फिर बोली कि कल मैं दरभंगा जा रही थी तो एक गाड़ी रॉन्ग साइड से आ रहा था तो एक्सीडेंट हो गया। एक अंगुली टूट गया है।
वो जब ये सब बातें बता रही थी तो हमको इतनी हंसी और उनकी मासुमियत पर प्यार ही प्यार आ रहा था..
एक बात और कि वो उस दिन बहुत खूबसूरत लग रही थी।।
बस.. एक बार फिर से मेरी जिंदगी में आ जाओ मेरी जान..!!
VARSHABHINAV