2. प्यार के बीज का अंकुरित होना

जब नंबर लिया तो हमको ये पता नहीं था कि ये उनका नंबर है या उनके पापा का। क्योंकि उस समय 2015 में सबके हाथ में मोबाइल नहीं होता था। लेकिन फिर भी लगता था कि ये नंबर उनका ही है। मैं शाम में अपने कुत्ता रॉकी को घूमने जाता था तो सोचता था कि उनको कॉल करूं लेकिन नंबर के बारे में पता नहीं होने के कारण (किसके पास ये नंबर है) कॉल नहीं कर रहा था। लेकिन अनुमान यही था कि ये नंबर उनका ही होगा

एक दिन उनको (करीब एक महीने के बाद) कॉल किया तो उसके पापा जी की आवाज सुना तो मैने कॉल काट दिया लेकिन फिर से उनका कॉल बैक आया तो मैंने रिसीव नहीं किया।

लेकिन मन को ये मना रहा था कि ये नंबर वर्षा का ही है और अभी वो घर पर है तो उसके पापा जी के पास हो सकता है।

इसके बाद तो मैंने उनको कॉल नहीं किया। लेकिन जब प्यार अपने बीज से निकल रहा होता है तो वो बहुत छटपटाता है, जैसे बिन पानी के मछली।।

मैंने सोचा कि अब मैं क्या करूं..?? लेकिन प्यार करने वाले दीवाने को कौन समझाए.. की ये जो इश्क है अगर मिल जाए तो सब कुछ नहीं तो सब कुछ लुट जाता है..!!

इसी बीच बिहार में विधानसभा चुनाव (2015) हुआ और उसके रिजल्ट के दिन मैंने उनको कॉल किया। मैं डर भी रहा था कि कहीं उनके पापा जी न कॉल रिसीव करें क्योंकि मेरे पहली बार कॉल करने पर वही कॉल रिसीव किए थे। तो थोड़ी मन में आशंका थी ही।

लेकिन मैं फिर सोचा कि इलेक्शन के रिजल्ट के बारे में पूछूंगा।

वो लोकेशन भी याद है जहां से मैंने उनको कॉल किया (मेरे तालाब के पास से) क्योंकि वहां हमको सकूं मिलता था। जब मैं बहुत एक्साइटमेंट में उनसे यह पूछने के लिए कॉल किया कि किसको जीता रही हो तुम, लेकिन कॉल उनके पापा जी ने उठाया जैसा पहले से ही ये अनहोनी होने का डर था मेरे मन में.. 😭😭

इसी को कहा जाता है कि दिल के अरमां आंसुओं में बह गए..

अंकल जी हमसे पूछे तो मैंने कहा कि वर्षा को कॉल किया था यही पूछने के लिए की किसको जीता रही हो तुम.. यही सब कोई 2 मिनिट्स बात हुआ होगा और कॉल को मैंने काट दिया।

जो मैंने रेगिस्तान में बीज बोने की बात की थी वो रेगिस्तान यही था..

खैर.. उसके बाद मैंने सोचा कि कभी उनको कॉल नहीं करूंगा और उनको कभी कॉल भी नहीं किया क्योंकि हमको लगा कि वो अपने लाइफ में मस्त है।

ऐसे हमको बुरा भी लगा था कि उसने उन्होंने अपने पाप जी का नंबर क्यों दिया?? सीधा सीधा बोल देती की अपना नंबर नहीं दूंगी.. तो फिर हमको भी कोई टेंशन नहीं होता।।

क्योंकि प्यार जबरदस्ती से नहीं होता.. बस.. हो जाता है..

लेकिन हमको 9th क्लास से ही उनकी आंखों में प्यार दिखता था और मैं उनकी आँखें तो शायद अवश्य ही शत् प्रतिशत पढ़ लेता था (ऐसा हमको लगता था)। हमको लगता था कि जैसे मेरे मन में उनके लिए प्यार है वैसा ही प्यार उनका भी मेरे लिए होगा। क्योंकि प्यार बोल कर नहीं किया जा सकता है केवल इसको महसूस किया जा सकता है और मैंने 9वीं क्लास से 12वीं तक उनकी आंखों में यही देखा और महसूस किया। और सबसे बड़ी बात ये होती है कि कोई 9th या 10th का बच्चे को प्यार होता है तो उसको अट्रैक्शन कह सकते हैं लेकिन जो बच्चा 12th कर लिया है तो उसको अट्रैक्शन और प्यार के बीच फर्क पता चलता है।

अगर ऐसा नहीं रहता तो मैं कभी उसी समय ये नहीं सोचता कि अगर वर्षा से मेरी शादी नहीं हुई तो मैं दुनिया में कभी किसी से शादी नहीं करूंगा।। यहां तक कि उससे मेरी बात भी नहीं होती थी और न ही उनका नंबर था मेरे पास।।

हां.. लेकिन लोग स्वतंत्र है कि कोई किसी को प्यार करे या न करे।

फिर अचानक एक दिन उनका कॉल आया..

मैंने देखा नहीं और जब मैंने देखा तो नदी किनारे जाकर कॉल बैक किया तो उन्होंने ही उठाया तो मैने कहा कि तुम तो कॉल ही नहीं करती हो..?? तो उन्होंने बोला कि किसी और को लगा रही थी तो गलती से तुमको लग गया..और अभी वो बिजी है बाद में कॉल करेगी।

एक बार फिर से मेरा सपना एक चमकती हुई शीशे की तरह गिरकर टूट गया तो उस टुकड़े पर केवल अभिनव ही अभिनव लिखा हुआ था.. दूर दूर तक कोई वर्षा का नाम नहीं दिख रहा था और ना ही उसकी कोई परछाई..

केवल इंतजार ही इंतजार..!!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top