1. प्यार की शुरुआत

ऐसे तो प्यार की शुरुआत 9th क्लास से ही हो गई थी। लेकिन ये बात है 2015 की जब वर्षा इंजीनियरिंग कॉलेज में गई और उनको पहली बार एंड्रॉयड फोन मिला। मैं एक दिन दुर्गा पूजा के समय अपने दुकान पर गया तो उनके पापा जी ने हमको बुलाया और कहा की अभिनव तुम मेरे घर जाकर वर्षा को मोबाइल चलना सिखा देना.. की एक नया मोबाइल खरीदे हैं और उसको चलाने आता नहीं है।।

मैं तो मन ही मन खुश हो गया कि वर्षा से काफी टाइम के बाद मिलना होगा। तो मैं उसी टाइम वर्षा के घर गया।

उसके घर पहुंचा वैसे ही उसको देखा कि वो घर से बाहर आई। मैं उनको देख तो मानो 10 सेकंड के लिए मैं एकदम से फ्रीज हो गया। ऐसा फिल्मों में मैं देखता था लेकिन मेरे साथ हो गया। मैं कुछ समझ नहीं पाया। उसके बाद मैं वर्षा को जस्ट बोला कि कैसी हो?? वो बोली – मैं अच्छी हूं.. तुम कैसे हो??

उसको देखकर बहुत अच्छा लगा। अब 9th क्लास के समय का अट्रैक्शन वाला समय चला गया था। आज बहुत दिनों के बाद उसको देखा तो बहुत अच्छा लगा। मेरे दिल को सकूं मिला।

उसके बाद उसको बताया कि अंकल जी भेजे हैं, तुमको मोबाइल चलना सिखा देने के लिए।। उसके बाद मैं उसको कुछ कुछ बताया।।

उसके बाद वो उस दिन चाट बनाई थी जो हमको खिलाई। अब हमको वो इतना अच्छा लगा कि मत ही पूछिए। ऐसे भी चाट मेरा फेवरेट डिश है लेकिन उसके हाथों में जादू था या उसके प्यार का कमाल ये तो भगवान ही जाने।

बस.. हमको बहुत अच्छा लगा और ये बात मैंने वर्षा को बताया भी।

खैर उनके मोबाइल में जीमेल बनाना था और भी कुछ बताना था जो मैंने उनको बताया भी। उसके बाद उसके कॉलेज के बारे में पूछा उसके ब्रांच का सिलेबस भी देखा।

वो मेरे बारे में पूछी कि तुम क्या कर रहे हो तो मैंने अपने बारे में भी बताया।

हम जैसे पहले दोस्त थे वैसे ही दोस्त की तरह अभी भी बात कर रहे थे। लेकिन मेरे दिल में एक तड़प और एक बेचैनी थी। और ये बेचैनी क्यों थी पता नहीं।

“शायद इसी बेचैनी को प्यार कहते हैं।।”

उसकी बहन और भाई सब थे। काफी देर बात किए। हमको उससे बात करना अच्छा लग रहा था और जाने का मन भी नहीं हो रहा था लेकिन जाना था।

(शायद जिंदगी से भी जाना है/था)

थोड़ी देर के बाद उसने हमको कहा छत पर चलने को, तो मैं उसके साथ गया लेकिन साथ साथ उसका भाई भी गया।

फिर हम ऊपर थोड़ी देर खड़े रहे और बात किए। मेरे मन में हो रहा था कि हम नंबर मांगे लेकिन समाज नहीं आ रहा था कि कैसे मांगे क्योंकि उसका भाई ऊपर ही था..

फिर हम बोले कि चलो नीचे तो अब लोग नीचे चलने लगे लेकिन उसका भाई सबसे पहले नीचे गया और मैं थोड़ा इग्नोर करके धीरे धीरे चले और वो भी.. तभी हमको उनसे उनका नंबर मांगने का टाइम मिला तो मैं बोला कि वर्षा तुम अपना नंबर दो। फिर वो अपना नंबर दी.. 778195****

फिर हम नीचे आए और थोड़े देर के बाद मैं रिटर्न अपने घर आया।।

यहीं से एक नई शुरुआत हुई.. शायद हमारे इश्क और प्यार के बीच के रेगिस्तान की मिट्टी में “प्यार का बीज” गिर चुका था। रेगिस्तान कहने का कारण आपको अगले कहानी में पता चलेगा.. क्योंकि नंबर तो ले लिया था लेकिन बातों की शुरुआत “अभी दिल्ली दूर है” जैसा था..

VARSHABHINAV

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